बिहार के कार्यवाहक राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने नीतीश कुमार के आरोपों पर जवाबी हमला बोला है। महामहिम ने कहा है कि नीतीश कुछ भी बोलने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि लोग बहकावे न आएं। नीतीश 48 घंटे में मुख्यमंत्री बदलना चाहते थे। त्रिपाठी ने कहा कि जनवरी में ही यह तय हो गया था कि 20 फरवरी से दोनों सदनों का बजट सत्र बुलाया जाएगा। नीतीश ने 9 फरवरी को संख्या बल का हवाला देकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। हमने कानूनी विशेषज्ञ की राय और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पढ़ने के बाद 11 की रात फैसला ले लिया कि 20 फरवरी को विधानसभा के संयुक्त सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद मांझी विश्वास मत पेश करेंगे और उस पर वोटिंग होगी। दो दिनों में कौन-सी देरी हो गई जो नीतीश राजनीतिक बयानबाजी करने लगे। उन्होंने कहा कि मांझी ने भी मुझसे मिलकर बहुमत होने का दावा किया। अब ऐसी स्थिति में कोई भी फैसला विधानसभा के पटल पर ही संभव है, इसलिए मैंने संविधान में दिए गए प्रावधानों के मुताबिक फैसला लिया, जहां तक ज्यादा समय दिए जाने की बात है तो विशेष सत्र आनन-फानन में बुला पाना संभव नहीं है, जबकि पहले से ही बजट सत्र 20 फरवरी तय है। उन्होंने कहा कि पूरी संवैधानिक प्रक्रिया पर उंगली उठाना और राजनीतिक बयान देना एकदम गलत है।